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शि क्षक दिवस
गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः
गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म
तस्मै श्री गुरवे नमः ॥
आज शिक्षक दिवसहै तो सबसे पहले मैं सभी शिक्षकों को धन्यवाद कहूंगी , क्योंकि आज हम लोग जहां पर हैं, जो भी है, आप की वजह से हैं।
आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं शिक्षक दिवस की।
The way you care, the knowledge you share
The love you shower, has men's power
The work with obtimism, dear teacher you are awesome
.
A very happy teachers day to all my teachers ..
आज 5 सितंबर है मतलब teachers day । आज के दिन शिक्षक दिवस मनाया जाता है , पर क्या आप जानते हैं कि यह शिक्षक दिवस 5 सितंबर को ही क्यों मनाया जाता है ? क्योंकि 5 सितंबर सन 1888 को डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी का जन्म हुआ था और आज के दिन जे.पी. नायक जी की भी जन्म तिथि है और हमारे महात्मा फुले ने जो कि सावित्रीबाई फुले को पढ़ाया था। सावित्रीबाई फुले पहली लेडीस टीचर बने और वही हमारी और वही हमारी पहली गुरु भी कहलाती हैं। इन्हीं सब महान आत्माओं को याद करने के लिए हम आज शिक्षक दिवस मनाते हैं। आइए जानते हैं संक्षिप्त परिचय डॉ राधा कृष्ण जी के बारे में डॉक्टर राधाकृष्णन जी का जन्म एक तेलुगु ब्राह्मण परिवार के तिरुपति में हुआ था । डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की प्रारंभिक शिक्षा क्रिश्चियन मिशनरी संस्था लुथानं मिशन स्कूल तिरुपति में 1896 से 1900 के मध्य हुई। फिर इन्होंने मद्रास के क्रिश्चियन कॉलेज में शिक्षा ग्रहण की । उन्होंने दर्शन शास्त्र में एमए किया और 1916 मद्रास रेजीडेंसी कॉलेज में सहायक प्राध्यापक नियुक्त हुए । डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन बचपन से मेधावी थे । उन्होंने अपने लेखक और भाषणों में विश्व को दर्शनशास्त्र से परिचित कराया। वह एक महान स्वतंत्रता सेनानी भी थे और वह एक महान दार्शनिक शिक्षक भी थे। डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन 13 मई 1952 से 12 मई 1962 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहे । वह 13 मई 1962 से 13 मई 1967 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। वह स्वतंत्र भारत के दूसरे राष्ट्रपति थे। एक बार एक विद्यार्थी ने डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी से पूछा कि क्या हम लोग आपका जन्मदिन मना सकते हैं ?तब उन्होंने यह बोला कि अगर आपको मेरा जन्मदिन मनाना ही है तो आप लोग 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में घोषित कर दीजिए और यह इस दिन मेरा ही नहीं बल्कि सभी शिक्षको का जन्मदिन मनाया जाएगा। इसे शिक्षक दिवस के रुप में मनाया जाए , तो मुझे बहुत गर्व होगा । उसी दिन से देश में शिक्षक दिवस 5 सितंबर को मनाया जाने लगा ।
देश में पहली बार शिक्षक दिवस 5 सितंबर सन 1962 को मनाया गया था । तभी से आज तक 5 सितंबर को हम लोग शिक्षक दिवस मनाते हैं । एक बार सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी इंग्लैंड में भाषण दे रहे थे , वहां पर बहुत बड़े-बड़े लोग उनका भाषण सुन रहे थे ।तभी वहां पर उपस्थित एक अंग्रेज ने उनसे पूछा कि क्या हिंदू नाम का कोई है ? कोई संस्कृति है, तुम कितने बिखरे हुए हो, तुम्हारा एक सा रंग नहीं, कोई गोरा, कोई काला ,कोई धोती पहनते तो, कोई लुंगी, कोई कुर्ता तो कोई कमीज । देखो हम सभी अंग्रेज एक जैसे हैं, एक ही रंग और एक ही पहनावा है। इस पर राधाकृष्ण जी ने जवाब दिया कि घोड़े अलग-अलग रंग के होते हैं , पर सारे गधे एक जैसे होते हैं । डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की मृत्यु 86 वर्ष की आयु में 17 अप्रैल 1975 को हो गई । शिक्षा जगत में राधा कृष्ण जी का नाम सदैव याद रहेगा।
शिक्षक एक दीपक किं तरह होता है जो स्वयं जलकर अपने विद्यार्थियों का भविष्य उजागर करता है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर द्रोणाचार्य नहीं होते तो अर्जुन नहीं होते , अगर रामकृष्ण नहीं होते तो विवेकानंद नहीं होते , अगर आचरेकर नहीं होते तो सचिन तेंदुलकर नहीं होते हैं। मतलब हर सफल मनुष्य के पीछे उसके गुरू का बहुत बड़ा योगदान रहा। साधारण पौधे रूपी मनुष्य को सींच कर एक विशाल वृक्ष बनाने का काम हमारे शिक्षक ही करते हैं।
शिक्षक दिवस मनाने के लिए हम 5 सितंबर को ही मनाते हैं पर क्या सिर्फ 1 दिन ही काफी है इन को सम्मानित करने के लिए, इनको सम्मान देने के लिए ? जी नहीं, इनका तो सम्मान हमें हर दिन करना चाहिए, क्योंकि यह है तो हम हैं , इनसे ही हम हैं और हमारे शास्त्रों में भी गुरु का दर्जा सबसे ऊपर बताया गया है : -
गुरु गोविन्द दोऊ खड़े ,
काके लागूं पाए . ..२|
बलिहारी गुरु आपने ,
गोविन्द दियो बताय ||
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टीचर अपने स्टूडेंट का भविष्य बनाने के लिए निस्वार्थ भाव से दिन रात एक कर देते है। हमारी पहली टीचर हमारी मां होती है जो कि हमें हमारा प्रारंभिक ज्ञान देती है और यही नहीं हमें मां शब्द बोलना भी हमारी मां ही सिखाती हैं । हमारा पहला स्कूल हमारा घर होता है , जहां हम रहन सहन , उठना बैठना ,आदि चीजें सीखते हैं। जीवन में एक गुरु का होना बहुत जरूरी है और वह हमें किसी भी रूप में मिल सकता है , चाहे वह एक पिता, माता, भाई ,बहन, शिक्षक , या कोई भी हो। एक शिक्षक की बातों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है, खासतौर पर नन्हे-मुन्ने बच्चों पर ।
मान लीजिए अगर एक बार किसी शिक्षक ने अगर गलती से यह कह दिया कि 2 +2 = 5 होता है , तो अगर माता-पिता तथा अन्य जितना मर्जी कहे कि
2 +2 =4 होते हैं, लेकिन नन्हे-मुन्ने बच्चे नहीं मानेंगे , वे टीचर की बातों को पत्थर की लकीर मानते हैं । इसी बात से आभास होता है कि शिक्षक की बातों का हमारे जीवन में कितना बड़ा असर होता है। मै इन चार पंक्तियों से अपने शिक्षको का शुक्रगुजार करना चाहूंगी:-
भगवान ने दी जिंदगी ,
माता पिता ने दिया प्यार ।
जीवन के हर पहलू को शिक्षित करने में ,
अपने शिक्षक का हूं मैं शुक्रगुजार ।।
धन्यवाद जय हिंद जय भारत
धन्यवाद
विद्यार्थी- शिक्षिका:- विजयलक्ष्मी शुक्ला
वर्ग- बी०एड० द्वितीय वर्ष (डिवीज़न- मराठी)
पी०वी०डी०टी०कॉलेज ऑफ़ एजुकेशन फॉर वोमेन
( एस०एन०डी०टी० महिला विद्यापीठ )
Excellent writing. Congratulations
ReplyDeleteThank you so much sir....🙏🙏
ReplyDeleteGreat job dear. Keep it up💯👍
ReplyDeleteThanks dear
DeleteNice Laxmi keep it up
ReplyDeleteThank you so much sir🙏
DeleteVery nice dear superb
ReplyDeleteThanks dear
DeleteSuperb
ReplyDeleteVery nce work... excellent lines...keep it up laxmi
ReplyDeleteThank you so much
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